कांग्रेस ने आरक्षित सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :-
प्रदेश की 5 लोकसभा सीटों पर नाम का ऐलान
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशी घोषित करने में बाजी मार ली है। छत्तीसगढ़ के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। पहली सूची में पार्टी हाईकमान ने पांच लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बस्तर से दीपक बैज, रायगढ़ से लालजीत सिंह राठिया, सरगुजा से खेलसाय सिंह, जांजगीर चांपा से रवि भारद्वाज और कांकेर से बिरेश ठाकुर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
बस्तर से दीपक ने लड़ाएंगे किला
राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और आदिवासी नेता के रूप में पहचान बनाने वाले दीपक बैज विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। वे अब लोकसभा में दमखम दिखाएंगे।
दिग्गजों को हरा चुके हैं खेलसाय
छत्तीसगढ़ की सरगुजा लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है। इस सीट पर लगातार 15 साल यानी की तीन लोकसभा चुनाव से भाजपा का कब्जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी खेलसाय सिंह को 2004 में बीजेपी के नंदकुमार साय ने 10 हजार से अधिक वोट से चुनाव हराया था, लेकिन एक बार फिर कांग्रेस ने खेल सायसिंह पर दांव लगाया है। हालांकि जातिगत समीकरण में आधार पर प्रेम साय सिंह फिट बैठते हैं लेकिन बाकी के अन्य समीकरण के बाद परिणाम ना जाने क्या रंग लाएगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस सीट पर पिछले 4 बार से बीजेपी का ही कब्जा है। वर्तमान में कमलभान सिंह मराबी यहां से सांसद हैं। लोकसभा के 2004, 2009 और 2014 चुनावों में सरगुजा सीट पर बीजेपी ही
जीतती आ रही है।

जांजगीर-चांपा से रवि भारद्वाज पर भरोसा
जांजगीर-चांपा से कांगेस ने रवि भारद्वाज को टिकट दिया है। कांग्रेस नेता रवि भारद्वाज के पिता स्व. परसराम भारद्वाज साल 1980 से 1999 तक लगातार पांच बार कांग्रेस से सांसद रहे हैं। वहीं रवि भारद्वाज भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी और युवा कांग्रेस के सचिव भी रह चुके हैं। क्षेत्रवासियों के आग्रह पर उन्होंने जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से अपनी सशक्त दावेदारी पेश की थी, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है।

रायगढ़ से लालजीत सिंह को दिया टिकट, आदिवासी समाज में जश्न
रायगढ़ से कांग्रेस ने लालजीत सिंह पर भरोसा दिखाते हुए टिकट दिया है। लालजीत सिंह धर्मजयगढ़ के कापु गांव के रहने वाले हैं, जो कि पेशे से एक किसान हैं। वे धरमजयगढ़ विधानसभा से विधायक भी हैं। आदिवासी समाज में लालजीत सिंह लोकप्रिय हैं। इस खबर से पूरे समाज में जश्न का माहौल है। साथ ही उनके समर्थकों में भी काफी खुशी देखने को मिल रही है।
कांकेर से बीरेश ठाकुर ने कहा- उम्मीदों पर खरा उतरूंगा
कांकेर से कांग्रेस ने बीरेश ठाकुर को टिकट दिया। बीरेश ठाकुर के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। बीरेश ने भरोसा जताने के लिए पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद कहा है। टिकट मिलने पर बीरेश ठाकुर ने भूपेश बघेल, पी एल पुनिया और संगठन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वे उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। बीरेश ठाकुर रायपुर में पदस्थ एडी एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के बड़े भाई है, और वो 1995 से टिकट मांग रहे हैं। पहले विधायक की टिकट मांगी। फिर सांसद की मांगी और आखिरकार टिकट मिली सांसद की ही। ये तीसरा लोकसभा चुनाव है जब उन्होंने टिकट के लिए दावा ठोंका है। लेकिन मांगने और मिलने में 25 साल का इंतज़ार था। बेहद लंबा इंतजार। साल दर साल इंतज़ार करते रहे, मांगते रहे। नहीं मिली तब भी निष्ठा कम नहीं हुई। पार्टी के साथ जुड़े रहे, काम करते रहे।
राजनीतिक सफर
1990 में खेल साय सिंह सूरजपुर की एसटी आरक्षित सीट से विधानसभा चुनाव जीता, इसके बाद 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट अनारक्षित हुई लेकिन प्रत्याशी नहीं बदले दोनों ही दल आरक्षित वर्ग के प्रत्याशी ही मैदान में उतरते रहे लिहाजा 2003 और 2008 में भाजपा की टिकट से जीतने वाली नेत्री रेणुका सिंह को खेल साय सिंह ने 2013 में चुनाव हराया और एक बार फिर विधानसभा पहुंचे, लेकिन तब उनकी सरकार नहीं थी, 2018 में फिर विधानसभा चुनाव हुए और खेल साय सिंह इस सीट से फिर विजयी हुए और इस बार सरकार भी प्रदेश में कांग्रेस की बनी लिहाजा उन्हें सरगुजा विकास प्राधिकरण के जिम्मेदारी दी गई। इस जिम्मेदारी के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे थे की अब इन्हें लोकसभा की टिकट नहीं मिलेगी, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने सारे कयासों को मिथक करते हुए एक बार फिर खेल साय सिंह पर दांव लगाया है।
दुर्ग के मजबूत किले में कई
दावेदार कौन होगा खेवनहार
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ दुर्ग लोकसभा सीट वीवीआईपी सीर्ट बनकर उभरा है। सारे भूलेे-बिसरे कांग्रेसियों के साथ नए युवा दावेदार भी सक्रिय हो गए है। कांग्रेस के लिए दुर्ग लोकसभा सीट सबसे अहम है क्योंकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचंड मोदी लहर के बावजूद दुर्ग ही प्रदेश की एकमात्र ऐसी सीट थी, जिस पर कांग्रेस ने विजय पाई थी। लोकसभा की पांच सीटों पर नाम घोषित करने के बाद सबकी नजर दुर्ग पर आकर टिक गई है।
ताम्रध्वज साहू को मिली थी जीत
पिछले कई दशक से भाजपा ने दुर्ग लोकसभा में अपना आधिपत्य रखा था, लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू ने भाजपा की सरोज पांडेय को शिकस्त देकर भाजपा के किले को ढहा दिया। इस सीट के लिए नेताओं के रिश्तेदारों से लेकर आम कार्यकर्ता तक जुगत लगाने में जुटे हैं।
दिग्गजों के बेटे दौड़ में
कांग्रेस के कई दिग्गज अपने बेटे-बेटी के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। वर्तमान सांसद और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू अपने बड़े बेटे जितेंद्र साहू के लिए हाईकमान को मनाने की कोशिश कर रहे है। तो वहीं मुख्यमंत्री बूपेश बघेल के राजनीतिक गुरु दुर्ग कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले स्व. दाऊ वासुदेव चंद्राकर की बेटी और पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर भी ताल ठोंक रही हैं। इसके साथ ही राजेंद्र साहू और तुलसी साहू भी खुद को कांग्रेस का सच्चा सिपाही बताते हुए लोकसभा के टिकट पर अपना हक जता रहे हैं।
भूपेश के करीबी हैं राजेंद्र
राजेंद्र साहू ने आम कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति की शुरूआत की थी, लेकिन आज उनकी गिनती सीएम के करीबियों में की जाती है। इसके साथ ही बतौर महिला प्रत्याशी दावेदारी पेश कर चुकी तुलसी साहू का नाम भी मुख्यमंत्री की गुड बुक में शुमार रहता है।
और भी हैं कई नाम चर्चा में…
ं दुर्ग की राजनीति खास दखल रखने वाले प्रदीप चौबे और वर्तमान विधायक अरुण वोरा और दुर्ग कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व महापौर आरएन वर्मा का नाम भी चर्चा में है। ये चारों दावेदार इन दिनों राजनीति की फिजा में छाए हुए हैं। पहला नाम जितेंद्र साहू का है, जो वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस में मीडिया को-ऑर्डिनेटर का पद संभाल रहे हैं। जितेंद्र साहू गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के बेटे हैं और कांग्रेस में अच्छी खासी पैठ रखते हैं। इनकी दावेदारी को साहू समाज के प्रतिनिधि को तौर पर देखा जा रहा है।

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