ऑटो सेक्टर पर संकट गहराया, कारों की बिक्री में भारी गिरावट

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :-  ऑटो सेक्टर में मंदी का संकट गहराता जा रहा है। सेल्स में गिरावट के चलते ऑटोमोबाइल कंपनियां को प्रोडक्शन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल कंपनियों की एसोसिएशन सोसाइटी ऑफ ऑटो मनुफैक्चरर्स (SIAM) ने आंकड़े जारी कर बताया है कि जुलाई महीने में  पैसेंजर्स कार के सेल्स में दो दशक में सबसे बड़ी गिरावट आई है। दिसम्बर 2000 में पैसेंजर कार के सेल्स में 39.86% की गिरावट आई थी। वहीं इस साल जुलाई 2019 में पैसेंजर कार के सेल्स में 30.98% की गिरावट देखने को मिली है।

संकट में ऑटोमोबाइल सेक्टर

सोसाइटी ऑफ ऑटो मनुफैक्चरर्स यानी सियाम द्वारा जारी किये आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2019 महीने में पैसेंजर व्हीकल के प्रोडक्शन में 16.52% की गिरावट आई है।  जुलाई में कुल 3,10,254 पैसेंजर वेहिकल का प्रोडक्शन हुआ जबकि जुलाई 2018 में 3,71,640 पैसेंजर व्हीकल का उत्पादन हुआ था। सेल्स पर नजर डालें तो जुलाई महीने में पैसेंजर व्हीकल की सेल्स में 30.98 % की गिरावट आई है।  जुलाई 2019 में कुल 200790 पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री हुई जबकि 2018 जुलाई में 290931 गाड़ियों की बिक्री हुई थी। टू व्हीलर का प्रोडक्शन जहाँ 9.56% जुलाई में घटा है वहीं सेल्स में भी 16.82% की गिरावट आई है।अप्रैल से जुलाई 2019 तक में गाड़ियों के प्रोडक्शन में 10.65% की गिरावट आई है। ऑटो कंपनियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 9724373 गाड़ियों का उत्पादन किया जबकि अप्रैल जुलाई 2018 में कुल 10883730 गाड़ियों का उत्पादन हुआ था।  अप्रैल से जुलाई 2019 तक में गाड़ियों के सेल्स में 13.90 % की गिरावट आई है।  जिसमे पैसेंजर कारों की सेल्स में 21.56 % टू व्हीलर के सेल्स में 12.93 की कमी आयी है।

रोजगार पर असर

ऑटो सेक्टर में इस स्लोडाउन का असर रोजगार पर पड़ा है। गाड़ियों के 300 शोरूम बन्द हो गए हैं। सियाम के डीजी विष्णु माथुर ने बताया कि डीलरशिप बन्द होने से 2 लाख लोगों नौकरियां चली गयी है। तो ऑटो मनुफैक्टरर्स को ऑटो पार्ट्स सप्लाई करने वाली कंपनियों ने करीब 15000 हजार कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे लोगों को निकाला है। और 10 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। पूरा ऑटो सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 37 मिलियन( 3.70 करोड़) लोगों को रोजगार देता है।सियाम ने ऑटो सेक्टर को संकट से निजात दिलाने के लिए सरकार से गाड़ियों पर जीएसटी घटाने की मांग की है। साथ ही सस्ती दरों पर आसानी से कर्ज मुहैया हो इसकी भी सरकार व्यवस्था करे। ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार को सुझाव दिया कि स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत सरकार नई गाड़ी पर टैक्स बेनिफिट भी दे। साथ ही हाइब्रिड व्हीकल पर भी जीएसटी की दर को कम किया जाए।बीते हफ्ते ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर अपनी मांगों की फेहरिस्त सौंपी है। और उन्हें उम्मीद है की सरकार ऑटो सेक्टर को संकट से उबारने के लिए जल्दी राहत पैकेज का ऐलान करेगी।

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