एक ईमेल से इस खरबपति को लगा 126 अरब रुपये का फटका

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- नई दिल्ली प्रमुख दवा निर्माता कंपनी सन फार्मा के प्रमुख दिलीप सांघवी (Dilip Shanghvi) को व्हिसलब्लोअर के एक ईमेल से अरबों का फटका लग चुका है. कंपनी के शेयरों में पिछले 10 दिनों से जारी गिरावट के कारण 126 अरब रुपये का झटका लगा. हालांकि, गुरुवार को कंपनी के शेयरों ने थोड़ी रिकवरी की और 413 रुपये पर बंद हुए. इससे पहले बुधवार को कंपनी के शेयर 5 साल आठ माह के निचले स्तर पर लुढ़क गए थे. आइए इस पूरे मामले में 10 पॉइंट में समझने की कोशिश करते हैं:

1. इस पूरे मामले की शुरुआत एक व्हिसलब्लोअर द्वारा सेबी को भेजे एक ईमेल से शुरू हुई जिसमें उसने सन फार्मास्युटिकल (Sun Pharma) इंडस्ट्रीज के फाउंडर-मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी पर और उनके ब्रदर-इन-लॉ सुधीर वालिया पर धर्मेश दोशी के साथ वित्तीय अनियमितता में लिप्त होने का आरोप लगाया था.

2. दरअसल, सन फार्मा और प्रमोटर दिलीप संघवी के खिलाफ अनियमितता के आरोप हैं. 2017 में सन फार्मा के एमडी और 9 अन्य एंटिटीज़ की 18 लाख के सेटलमेंट चार्ज को लेकर इनसाइडर ट्रेडिंग की जांच हुई थी, जो मामला बंद हो गया था, लेकिन अब यह केस फिर से खुल सकता है. इनमें कर्मचारियों और अन्य को 25 करोड़ डॉलर का कर्ज देने का फैसला भी शामिल है.

4. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी ने सोमवार को कॉन्फ्रेंस कॉल में निवेशकों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया. इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में सन फार्मा के एमडी दिलीप संघवी ने सफाई देते हुए कहा है कि इनसाइडर ट्रेडिंग केस में सेबी ने कोई जवाब नहीं मांगा है.

5. कंपनी ने कहा, रैनबैक्सी का अधिग्रहण सेबी नियमों के मुताबिक हुआ है और नैटको फार्मा शेयरों के खरीद से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक की गई हैं.

6. कंपनी ने बयान में कहा कि वह अपनी विश्वसनीयता और कॉरपोरेट गवर्नेंस को फिर से स्थापित करने के लिए काम करेगी. इसके लिए पहले के कुछ फैसलों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें वापस भी लिया जा सकता है. इनमें कर्मचारियों और अन्य को 25 करोड़ डॉलर का कर्ज देने का फैसला भी शामिल है.

7. सन फार्मा का शेयर 7 अप्रैल 2015 को 1200.7 रुपये पर अपनी सार्वकालिक ऊंचाई पर था.

8. अप्रैल 2015 में, सन फार्मा के एमडी दिलीप सांघवी की शुद्ध हैसियत 25 अरब डॉलर आंकी गई थी. साल 2015 में सबसे भारतीय अमीर के तौर पर उन्होंने कुछ समय के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को भी पीछे छोड़ दिया था.

9. उसके बाद कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज की गई और उसका मुख्य कारण रैनबैक्सी इकाइयों के लिए अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए द्वारा उठाई गईं समस्याएं रहीं.

10. देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मा ने 2018-19 की दूसरी तिमाही में 219 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था.

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