इस साल गोगा पंचमी का त्योहार कब मनाया जायेगा जानिये महत्व और पूजा की विधि

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :-  गोगा पंचमी 2019: श्रावण मास के बाद भाद्रपद मास आता है, इस मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को गोगा पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है, इस दिन गोगाजी की पूजा की जाती है. इस साल गोगा पंचमी का त्योहार 20 अगस्त को है. इस दिन गोगादेव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि गोगादेव सर्पदंश से जीवन की रक्षा करते हैं. इस दिन नाग देवता की पूजा भी की जाती है. इससे जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार चार दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी को मनाया जाता है, जो गोगा नवमी के नाम से प्रसिद्ध है.
गोगा पंचमी के दिन जाहरवीर गोगा जी की पूजा करने से गोगा जी महाराज सर्प के काटने से हमारी रक्षा करते हैं. इस दिन गोगा जहार वीर की पूजा के साथ-साथ नाग देवता की पूजा भी की जाती है. गोगा पंचमी के दिन जाहरवीर गोगा जी की पूजा के लिए साफ दीवार को गेरू से पोतकर दूध में कोयला मिलाकर चौकोर चौक बनाकर उसके अन्दर पांच सर्प बनाने चाहिए.गोगा पंचमी के दिन गोगादेव के साथ ही नाग पर भी दूध चढ़ाया जाता है. गोगादेव की पूजा के लिए साफ दीवार को गेरू से पोतकर दूध में कोयला मिलाकर चौकोर चौक बनाकर उसके अन्दर पांच सर्प बनाने चाहिए. इसके बाद इन सर्पों पर जल, कच्चा दूध, रोली, चावल, बाजरा, आटा, घी, चीनी मिलाकर चढ़ाना चाहिए और पंडित को दक्षिणा देनी चाहिए.यह भी मान्यता है कि गोगा देव बच्चों के जीवन की रक्षा करते हैं. इसलिए विवाहित स्त्रियां अपनी संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए गोगादेव की पूजा करती है. इसके साथ ही इस पूजा से विवाहित स्त्रियां सौभाग्यवती होती है और नि:संतान स्त्री की संतान प्राप्त होती है.
भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को गोगा पंचमी का पर्व आता है. आज गोगा पंचमी है इस दिन गोगादेव का पूजन करने का विधान है. माना जाता है कि गोगादेव सर्पदंश से जीव का रक्षण करते हैं. गोगादेव के साथ नाग देव का पूजन करने से सुहाग एवं संतान की उम्र लंबी होती है और वे सुखी-निरोगी जीवन व्यतित करते हैं. निसंतान महिलाएं ये पूजन अवश्य करें. जल्द ही उनके आंगन में बच्चे की किलकारियां गूंजेगी.                                                        ऐसे करें पूजन-
गोगादेव और नाग देव पर दूध अर्पित करें.
दीवार को साफ-स्वच्छ करके गेरू से पोतकर दूध में कोयला मिलाएं चौकोर चौक बनाकर उसके ऊपर पांच सांप बनाएं. फिर पानी, कच्चा दूध, रोली, चावल, बाजरा, आटा, घी और चीनी मिलाकर चढ़ाएं.
मंदिर जाकर पुजारी जी को यथासंभव दक्षिणा दें.