आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों के जिंदगी से खिलवाड़, कर्मचारी बांट रहे दवाइयां

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
सरकार ने गांवों में दस साल से खोल रखे हैं आयुर्वेदिक अस्पताल
बेमेतरा। जिले में आयुर्वेद गांवों का गठन कर औषधालय का संचालन दस सालों से किया जा रहा है। पर जिले के कई औषधालयों में डॉक्टरों की कमी है। कई डॉक्टरों के पास दो या तीन औषधालय का प्रभार है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं मरीजों भी परेशान हो रहे हैं। संचालनालय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी सिद्ध एवं होम्योपैथी, आयुष छत्तीसगढ़ योजना के तहत जिले में 27 औषधालयों का संचालन किया जा रहा है। जिले में मात्र 14 डॉक्टर कार्यरत-जिले के बेमेतरा विकासखंड 6 औषधालय, नवागढ़ में 6 औषधालय, बेरला में 7 औषधालय, साजा में 8 औषधालय का संचालन किया जा रहा है। जहां एक-एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, ओपीएडएस, एक सहायक का पद स्वीकृत है। जिसमें से जिले में 27 डॉक्टर के स्वीकृत पद में से 14 कार्यरत हैं, वहीं 13 पद रिक्त हैं। फार्मासिस्ट के 27 पद में से 25 में कार्यरत हैं। वहीं औषधालय सहायक के 27 पद में 15 में स्टाफ है। वहीं 12 पद रिक्त हैं। ओपीडीएस के 27 पद में से 23 में स्टाफ है। 4 पद रिक्त हैं। 27 आयुर्वेदिक औषधालय में से 18 के पास भवन है। वहीं 9 औषधालय दीगर भवनों में चल रहे हैं।
डॉक्टरों की कमी पड़ रही भारी-ग्राम पंचायत बोरतरा में दो आयुर्वेद अस्पताल बनाए गए हैं, जहां पर डॉक्टरों की कमी भारी पड़ रही है। ग्रामीण बजरुद्दीन कुरैशी ने बताया कि एक भी डॉक्टर नहीं होने से शो-पीस बना हुआ है। अस्पताल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। पुन्नू जंघेल, कुंभकरण जंघेल एवं विक्की वर्मा ने बताया कि छोटी-बड़ी बीमारी के लिए 12 किलोमीटर दूर साजा जाना पड़ता है। इसी तरह की स्थिति छिरहा, धुरसेना, कुरा, नांदघाट, कुसमी, बारगांव, टकसीवां, देवकर, परपोड़ी, खैरझिटीकला के औषधालयों की है, जहां पर स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं है।
अधूरी व्यवस्था के कारण हो रही दिक्कत-प्रदेश में 2008-09 से आयुष के तहत औषधालय शासन ने खोले हैं। जिले में प्रथम चरण में 9 औषधालय और दूसरे चरण में 9 एवं तीसरे चरण में 10 औषधालय शुरू किए गए हैं। जिसमें से अब तक जिले के 27 औषधालय के पास भवन नहीं है, जिससे कामकाज का संचालन प्रभावित हो रहा है। प्रभावित केंद्रों में नांदघाट, कुर्रा, मउ, गोडगिरी, देवरबीजा, खेड़ा, बारगांव एवं जेवरा है। इन केंद्रों में अस्थायी व्यवस्था कर कामकाज का संचालन किया जा रहा है।
ये काम प्रभावित हो रहे-आयुर्वेदिक अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन्हें उपाय बताए जाते हैं। मौसम अनुसार खानपान एवं रहन सहन की जानकारी दी जाती है। औषधियों के महत्व को समझाते हुए उनके संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है। जड़ी-बूटियों को अपनी जलवायु और बाजार के अनुसार खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाता है।
आयुर्वेद व योगा को बढ़ावा दिया जाता है। ये सभी काम डॉक्टरों की कमी की वजह से भी प्रभावित हो रहा है।

शासन के पास भेजा गया है प्रस्ताव
इस संबंध में बेमेतरा के जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शंकर वैष्णव ने कहा कि जिले में डॉक्टरों की कमी है, जिससे कई डॉक्टरों के पास दो व तीन औषधालयों का प्रभार हैं। वहीं कुछ केंद्रों के लिए भवन का अभाव है। इसके लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजा गया है।

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