आज से लागू CBDT की नई गाइडलाइन सिर्फ जुर्माना देकर नहीं बच पाएंगे कर चोर

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- केंद्र सरकार ने काला धन रखने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। कर चोरी कर काला धन जमा करने वाले अब महज जुर्माना देकर नहीं बच पाएंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इसके लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो सोमवार से लागू हो जाएंगे। इसके तहत कर चोरी के मामले में अदालत से बाहर कोई समझौता नहीं होगा। कर चोरी पर पूरा मुकदमा चलेगा और तय सजा उसे भुगतनी पड़ेगी। दिशानिर्देशों के अनुसार, काले धन और बेनामी कानून के तहत ज्यादातर अपराध सामान्यतया नॉन कंपाउडेबल होंगे, यानी सिर्फ जुर्माना देकर कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा। गाइडलाइन के मुताबिक, कोई भी संस्था या व्यक्ति कर चोरी के मामले के मामले में सिर्फ टैक्स की मांग, जुर्माना और ब्याज का भुगतान कर मामले का समाधान नहीं कर पाएगी। सोमवार से जो भी मामला कर चोरी के तहत आएगा, उसे नए निर्णय के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाएगा। सीबीडीटी ने 13 तरह के मामलों की सूची भी जारी की है, जो कंपाउडेड (कोर्ट के बाहर हल हो सकने वाले) श्रेणी में नहीं होंगे। साथ ही अपराधों को उनकी गंभीरता के हिसाब से दो श्रेणियों में बांटा गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को यह संशोधित गाइडलाइन संबंधित एजेंसियों के पास पहुंचाने को कहा है और उसी के अनुसार मामलों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।

जानबूझकर कर चोरी पर जेल जाना होगा
श्रेणी बी के तहत जानबूझकर कर चोरी करने के प्रयास के केस, खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को पेश न करने का केस और जांच-पड़ताल के दौरान गलत बयान दर्ज कराने के मामले आएंगे। जानबूझकर कर न देने, संपत्ति छिपाने या कर बचाने के लिए उसे किसी और नाम करने या छापेमारी के दौरान दस्तावेजों या सबूतों को छिपाने के मामले कोर्ट के बाहर नहीं सुलझाए जा सकेंगे। कोर्ट में इन मामलों पर मुकदमा चलेगी और सजा होगी। अघोषित या बेनामी संपत्ति से जुड़े काले धन के मामलों में भी कोर्ट के बाहर समझौते का विकल्प नहीं होगा।

छोटे-मोटे मामलों में नरमी संभव
अपराध की श्रेणी ए के तहत स्रोत पर कर न चुकाने या कम कटौती के मामले और धारा 115-0 के तहत कम चुकाए गए कर से जुड़े मामले आएंगे। पहली श्रेणी के तहत आने वाले वाले अपराधों का विकल्प खुला रखा गया है। यानी उनका कोर्ट के बाहर समझौता करने की मंजूरी दी जी सकती है। हालांकि ऐसे मामलों में किसी को तीन बार दोषी पाया जाता है तो बचाव का मौका नहीं मिलेगा।

वित्त मंत्रालय दे सकता है रियायत
दिशानिर्देशों में भी यह कहा गया है कि जिन मामलों में आयकर विभाग के अलावा प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई, लोकपाल, लोकायुक्त या अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी जांच कर रही हैं, उन्हें भी कोर्ट के बाहर खत्म नहीं किया जा सकता। इस पर पूरी जांच के बाद ही फैसला होगा। हालांकि वित्त मंत्रालय किसी तरह के मामलों में भी संज्ञान लेकर और आरोपी की कोर्ट के बाहर समझौते की याचिका पर सीबीडीटी की रिपोर्ट पर विचार करते हुए नियमों में रियायत दे सकता है।