आखिर क्या करें स्काई वॉक योजना का.. जनता ही बताए

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
सरकार बनते ही सीएम ने लोगों से पूछा
रायपुर। स्काई वॉक और स्काई योजना को लेकर कांग्रेस पहले से मुखर रही है। कांग्रेस इसका लगातार विरोध करते आई है। अब सीएम ने गेंद जनता के पाले में डाल दिया है। इसके बारे में जनता, इंजीनियर, आर्किटेक्चर, अधिकारी से हम जानना चाहते हैं कि आखिर इसका क्या करे और स्काई योजना का भी भी बतायें, उसके भी लाखों मोबाइल पड़े हैं। ये दो चीज स्काई योजना और स्काई वाक का क्या करना है, ये बतायें।
जनता जो राय देगी उसके अनुसार फैसला लूंगा
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्काई वॉक और स्काई योजना पर फैसला लेने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्काई वॉक का ढांचा खड़ा हो गया है। इस वजह से जनता से राय मांग रहा हूं। जनता जो राय देगी उसके अनुसार फैसला लूंगा। यह बात मुख्यमंत्री ने राजीव भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में कही। बघेल ने कहा कि स्काई योजना है जिसके तहत प्रदेश में मोबाइल बांटी गई। इसमें सरकार का पैसा खर्च हो चुका है। मैं अपने तरफ से इस पर कोई फैसला नहीं लूंगा। इन योजनाओं को क्या किया जाए। इस मुद्दे पर जैसे ही आम राय आएगी, उसके मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।
87 करोड़ की लागत
शास्त्री चौक, जय स्तंभ चौक और अंबेडकर अस्पताल से बीच पैदल यात्रियों के लिए रमन सरकार ने स्काई वॉक की नींव रखी थी। 87 करोड़ की लागत से बनाई जा रही है। भाजपा सरकार ने इसका ठेका जीएस कंपनी को दिया था। इसे पूरा करने की मियाद फरवरी 2018 रखी गई थी। लेकिन ठेकेदार ने बीच में काम बंद कर दिया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने दूसरे ठेकेदार को यह काम दिया गया। अब इसकी मियाद बढ़ाकर मई-जून कर दी गई। अब लोगों को सालभर और ट्रैफिक जाम की परेशानी से दो चार होना पड़ेगा।
स्काई ने बढ़ा दिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का टेंशन
स्काई ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की टेंशन बढ़ा दी है। खुद भूपेश बघेल ने इस टेंशन से निजात दिलाने के लिए सुझाव मांगे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पीसीसी दफ्तर में प्रेस कांफ्रेंस ले रहे थे। उसी दौरान राजधानी में बने स्काई वाक को लेकर उनसे पूछा गया, जिसका जवाब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद दिलचस्प अंदाज में दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ये स्काई वाक का क्या किया जाये, इसके लिए हम लोगों से सुझाव मांग रहे हैं, प्रबुद्धजन, नागरिकों से राय मांगकर कार्रवाई करने की बात कही। उसी जवाब में उन्होंने स्काई योजना के तहत बांटे गये मोबाइल को भी जोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्काई योजना का भी हजारों मोबाइल बचा हुआ है उसका भी क्या करें, ये बतायें। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इतना पैसा खर्च कर स्काई वाक तो खड़ा हो गया है, इसका किया क्या जाये।
567 करोड़ की स्काई योजना फेल
रमन सरकार ने 50 लाख लोगों को स्मार्ट फोन बांटने की स्काई योजना बनायी थी, जिसकी कुल लागत 567 करोड़ रुपये थी। हालांकि ये योजना पूरी तरह फेल रही, और फोन में कई तरह की शिकायतें बांटने के साथ ही आने लगी। वहीं स्काई वाक की योजना करीब 90 करोड़ रुपये की थी, इस योजना का शुरू से ही कांग्रेस विरोध कर रही थी। लेकिन चंद लोगों को फायदा देने के लिए भाजपा सरकार ने स्काई वाक को शहर में बनवा डाला, जिसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है।
फ्लाई ओव्हर बनाया जाए…
स्काई वाक को लेकर ‘जनता से रिश्ता’ ने राजधानी की आम जनता, टै्रफिक विशेषज्ञ, बुद्धिजावियों, इंजीनियर, आर्किटेक्चर, अधिकारियों से इसके सदुपयोग को लेकर चर्चा की। जिसमें सभी ने अपने विचार साझा कर सरकार को सुझाव दिया है कि शहर के अंदर बने इस स्काईवाक को फ्लाई ओव्हर के रूप में बदला जाना चाहिए इसके लिए इसमें ज्यादा फेरबदल की आवश्यकता नहीं होगी और सड़क के दोनों ओर एक-एक पिल्लर खड़ी कर फ्लाई ओव्हर बनाया जा सकता है। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

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