अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह पर शिकंजा नहीं कस पाई पुलिस

जनता से रिश्ता वेबडेस्क
खुलेआम चल रहा है जुआ-सट्टा, मादक पदार्थो की तस्करी का खेल
बड़े सटोरिए कांग्रेस को बधाई देते पोस्टर की बढ़ा रहे है शोभा
रायपुर। राजधानी में जितने भी स्लम बस्तियां है पंडरी, राजातालाब, फोकटपारा, तेलीबांधा, लिंक रोड, मोहदापारा, गुढियारी कुकरी तालाब,अशोक नगर, जनता कालोनी, खमतराई, बिरगांव, गोगांव, डब्ल्यूआरएस कालोनी की झोपड़ पट्टी, जरवाय, मोहबा बाजार, कबीर नगर हीरापुर, डंगनिया सुंदर नगर खारून के आसपास की बस्तियों, भाटागांव, सिविल लाइन, राजेंद्र नगर, जीईरोड से लगे बस्तियों, डीकेएस के पीछे शास्त्री मार्के ट, बैरन बाजार, टिकरापारा, सिद्धार्थ चौक, पुराना धमतरी रोड, अमलीडीह, सेजबहार, मुजगहन, डूंडा में जमीन की दलाली के नाम पर खुले आम जुआ सट्टा खिलाया जा रहा है। सट्टा की पर्चियां लिखने वाले सभी जगह सक्रिय है। इनको वहीं मोहल्ले के दादा-बदमाश संचालित कर रहे है। बड़े बदमाश और सटोरिए तो नेता बनकर कांग्रेस के पोस्टर और बैनर की शोभा बढ़ा रहे है। नवनिर्वाचित विधायकों और नवनियुक्त मंत्रियों के बधाई देने वाले हजारों की संख्या में राजधानी के चारों कोने में देखा जा सकता है। सट्टा और जुआ के सैकड़ों मामले में पुलिस ने जो कार्रवाई की वे सभी छोटे-मोटे सटोरियों के नौकर थे जिन्हें गिरफ्तार कर थाने से ही निजी मुचलके पर छोड़ दिया। बड़े खाईवाल सटोरिए जिनके बलबूते सट्टा चलता है उस पर तो पुलिस हाथ ही नहीं डाल रही है।
मोहल्लों में चलती है दादागिरी
अपराध की दुनिया की शुरूआत मोहल्ले से होती है, काले कारोबार में देखते ही देखते वे बेजात बादशाह बन जाते है। पुलिस और नेताओं रसूखदार कारोबारियों से संपर्क कर उनके पैसों से कारोबार को संतालित करते है। मोहल्ले बस्तियों में इन छुटभैय्या टाइप नताआं की तूती बोलती है। चुनाव के समय नेताओं की हाजिरी लगाकार वोट का जुगाडऩे वाले चुनाव के बाद खाली समय में ठेकेदारी शुरू कर देते है।
आऊटर में चलता है जुआ
जुआ संचालित करने वालों ने शहर के आउटर में कुछ पाइंट बना रखे है, जहां हर रोज जुआ चलता है। साथ ही छुट्टी के दिन विशेष तरह का समारोह आयोजित कर दूसरा नाम देकर जुआरियों को बुलाया जाता है। जहां खुले आम देर रात तक जुआ चलता है कोई शिकायत करने वाला ही नहीं है। जो हार जाते है या लंबे से उतर जाते है वे ही इस पाइंट के बारे में बताते है पर पुलिस में शिकायत नहीं करते।
पुलिस भी संज्ञान लेती है पर खींच लेती है कदम
पुलिस को सुरक्षा को लेकर राजधानी में कई तरह के दबाव रहते है, कभी जुआरियों सटोरियों पर अभियान तलाना भी चाहती है तो राजनीतिक कारणों से कदम खींच लशी का दंदा ेती है जिससे सटोरियों और जुआरियों के हौसले बुलंद हो रहे है। पास कालोनियों में फंक्शन के नाम पर रोज देर तक जुआ संचालित होता है। बाद में उसे मिलन समारोह या विदाई समारोह का नाम दे दिया जाता है। पुलिस इस तरह के आयोजनों पर नजर रखे तो रोज लाखों का जुआ-सट्टा पकड़ सकती है।