छत्तीसगढ़

ठेकेदारों का बिना लाभ काम करने का राज खुला

Admin2
3 Oct 2020 6:56 AM GMT
ठेकेदारों का बिना लाभ काम करने का राज खुला
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ज़ाकिर घुरसेना

भ्रष्टाचार की आशंका सच साबित हुई, सफाई व्यवस्था हासिए पर, चारों तरफ गंदगी का अंबार

टेंडर जारी होने के समय भी उठा था सवाल, जीरो लाभ पर मचा था बवाल

दस जोन के 70 वार्डों के लिए अलग-अलग सफाई ठेका जारी किया

रायपुर। नगर निगम ने सभी दस जोन के 70 वार्डों के लिए अलग-अलग सफाई ठेका जारी किया। प्लेसमेंट पर कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए ठेकेदारों ने टेंडर भरा। ठेका हथियाने के लिए ठेकेदारों ने कम से कम लाभांश (कमिशन जो ठेकेदारों को मिलता है) भरा। कुछ ठेकेदारों ने चार, तीन और दो प्रतिशत लाभांश का रेट भरा वहीं कुछ ने शून्य प्रतिशत लाभांश भी टेंडर में डाल दिया था। टेंडर जारी होने के समय इस पर काफी हंगामा भी हुआ। यह सवाल उठा कि कोई भी ठेकेदार बिना किसी प्रतिफल के कैसे काम करेगा। भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई गई। कहा गया कि कम लाभांश लेने पर ठेकेदार अपना मुनाफा वार्डों में कम कर्मचारी लगाकर करेगा। यह आशंका शुक्रवार को तब सही साबित हो गई जब वार्ड में सफाई कर्मचारी की जांच की गई और पाया गया कि वार्ड में तय संख्या की जगह कम सफाई कर्मचारी थे।

वार्डों में सफाई का ठेका जारी होने पर ठेकेदारों ने टेंडर हासिल करने के लिए जीरो प्रतिशत लाभांश पर रेट भरा। कुछ नहीं मिलने पर भी काम करने को राजी ठेकेदारों की अनियमितता अब सामने आने लगी है, जब वार्ड में तय संख्या से कम सफाई कर्मचारियों को लगाया जा रहा है। शुक्रवार को दो वार्डों में तय से कम संख्या में सफाई कर्मचारी मिले। महापौर ने तत्काल दोनों वार्डों के सफाई ठेकेदारों का ठेका निरस्त करने के लिए अफसरों को कह दिया।

खेल सफाई का

निगम में सफाई ठेके के नाम पर जमकर खेल चलता है। बड़ी संख्या में लोग निगम का सफाई ठेका हथियाने की कोशिश में रहते हैं। पिछले साल तक निगम में प्लेसमेंट पर 2300 कर्मचारी लिए जाते थे। नए कार्यकाल में निगम ने 1200 अतिरिक्त कर्मचारियों का प्रस्ताव शासन को भेजा। निगम ने इस बार 3500 कर्मचारियों का टेंडर जारी किया।

निगम प्रति कर्मचारी को कलेक्टर रेट पर यानी करीब आठ हजार रुपए महीने का भुगतान करता है। 3500 कर्मचारियों पर यह करीब 2.80 करोड़ रुपए का भुगतान होता है। साल में करीब 34 करोड़ का पेमेंट सफाई ठेकेदारों को होता है। ठेकेदार वार्डों में कम कर्मचारी लगाकर पूरी तय संख्या का भुगतान प्राप्त करते हैं। इस तरह की भारी अनियमितता वार्डों में चलती है। इससे वार्डों की सफाई प्रभावित होती है और दूसरी तरफ निगम को लाखों-करोड़ों रुपए की चपत भी लगती है।

तय संख्या 29, महापौर की गिनती में मिले 24 कर्मचारी

महापौर एजाज ढेबर ने गुरु गोविंद सिंह और पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के सुपरवाइजरों को निलंबित करने और दोनों ही वार्ड का ठेका निरस्त कर दोबारा टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। मेयर ने सुबह 6 बजे अचानक दोनों वार्डों का निरीक्षण किया और सुपर वाइजर से रजिस्टर मंगाकर खुद ही सफाई कर्मचारियों की गिनती करने लगे। गुरुगोविंद सिंह वार्ड के सुपरवाइजर ने वार्ड में 29 सफाई कर्मचारी होने की जानकारी दी। मेयर ने सभी को बुलवाकर मौके पर ही कर्मचारियों की गिनती की। इस दौरान पूरे वार्ड में 24 कर्मचारी ही ड्यूटी पर मिले।

शिकायत पर महापौर ने निरीक्षण किया

बार-बार वार्ड नंबर 29 और 35 में नियमित साफ-सफाई न होने की शिकायत पर महापौर एजाज ढेबर ने औचक निरीक्षण किया। दोनों वार्डों में उन्होंने बारी-बारी से कार्रवाई की। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल मौके पर वह रजिस्टर मंगा लिया, जिसमें सफाईकर्मियों की संख्या दर्ज है और उनकी हाजिरी ली जाती है। इनके ड्यूटी पर होने के हस्ताक्षर साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। लेकिन हकीकत ये थी कि मौके पर सफाईकर्मी कम थे। बहुतेरों की हाजिरी फर्जी थी। इस महापौर ने जिम्मेदार सुपरवाइजरों और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें निलंबित करने की अनुशंसा आयुक्त सौरभ कुमार से की। इसके बाद वार्ड 29 और 35 के सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ इन दोनों वार्ड के सफाई ठेका को निरस्त करने के भी निर्देश दिए।

मौके पर ही सुपरवाइजर सावन पात्रे को तत्काल निलंबित करने एवं वार्ड के सफाई ठेकेदार नवीन भारती को ठेका तत्काल निरस्त कर नई निविदा बुलाने के निर्देश दिए। इस दौरान जोन तीन के कमिश्नर और जोन स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे। इसे गंभीरता से लेते हुए 35 के वार्ड सफाई सुपरवाइजर प्रकाश समुंद्रे को तत्काल निलंबित करने के साथ ही सफाई ठेकेदार कार्तिकेश्वर साहू का ठेका निरस्त कर दिया।

पाइप लाइन बिछाने में पिछड़ा निगम, न कार्रवाई, न नोटिस

शहर में अमृत मिशन योजना लेटलतीफी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। समय बीत गया, लेकिन नगर निगम पाइप लाइन नहीं बिछा सका। संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, नोटिस तक नहीं दिया गया है। अब पाइप बिछाने के लिए जगह-जगह खोदे जा रहे गड्ढों से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। तीन माह पहले भी पाइप लाइन बिछाने में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थीं। पाइप को भूमिगत करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। इसके चलते आज जगह-जगह पाइप लाइन में लीकेज की समस्या सामने आ रही है।

शहर में नई पाइप लाइन के कनेक्शन और पुरानी पाइप लाइन को बदलने का काम जारी है। दोनों काम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी देखरेख पर निगम के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। अमृत मिशन के तहत हर घर नल कनेक्शन देने की योजना अभी लंबित है। नई और पुरानी टंकियों से शहर के बाहरी इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए 1364 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने का लक्ष्य तय है। पाइप लाइन बिछाने के लिए करीब 250 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बीते चार सालों में सिर्फ 194 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जा सकी है। दर्जनों कालोनियों में पाइप लाइन बिछाने का काम अधूरा है। बाहरी इलाकों में पाइप लाइन नहीं बिछ पाई है, जबकि यह काम 2019 में ही पूरा हो जाना था।

घटिया पाइप, गहराई भी कम

शहर के पुरानी बस्ती, मंगलबाजार, खोखोपारा, मोवा, तेलघानी नाका, गुढिय़ारी सहित अन्य मोहल्लों में करीब 800 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। जहां घटिया पाइप का इस्तेमाल किया गया, वहीं गहराई भी कम रही।

गड्ढे दलदल में तब्दील

बारिश के पहले फाफाडीह, डंगनिया, सुंदरनगर, आमानाका, जयस्तंभ, गोलबाजार, सदर बाजार और पुरानी बस्ती में पाइप लाइन बिछाने के बाद सिर्फ मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया। गड्ढों को ठीक से नहीं पाटने से वह दलदल में तब्दील हो गए हैं। नियमानुसार पाइप लाइन के नीचे कंक्रीटीकरण किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

नालियों से गुजरी पाइप लाइन

जनवरी में शहर में पीलिया फैल गया था, जिसके बाद नालियों से होकर लोगों के घरों तक पहुंची पाइप लाइन को बदलने का काम शुरू किया गया था। पाइप लाइन को नालियों से ऊपर उठाने का काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस संबंध में कई बार अमृत मिशन के नोडल अधिकारी आरके चौबे से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

बाकी वार्डों में भी होगी अचानक जांच

दो वार्डों में सफाई ठेकेदारों की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यह गंभीर मामला है। ऐसे ही निगम के बाकी वार्डों की भी अचानक जांच की जाएगी। कहीं भी गड़बड़ी मिलने पर तत्काल ठेका निरस्त किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। पाइप लाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें अब कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। जांच के बाद कार्रवाई भी तय करेंगे।

-एजाज ढेबर,

मेयर रायपुर

युवा मेयर एजाज ढेबर का यह कार्य काबिले तारीफ है,जो स्वयं होकर सफाई व्यवस्था देखने सड़क पर उतरे। इसी प्रकार अन्य वार्डों में भी सफाई,जल, सड़क. गार्डन की व्यवस्था को व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर सुचारू रूप से संचालित कराए। जिससे वार्डों में मलेरिया, डेंगू, पीलिया से मुक्ति मिले ।

-मो. फिरोज,

पर्यावरण प्रेमी एवं समाज सेवी

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