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छत्तीसगढ़

राहत: नए संक्रमितों वाले टॉप-10 राज्यों की लिस्ट से छत्तीसगढ़ बाहर

Admin1
4 May 2021 6:33 AM GMT
राहत: नए संक्रमितों वाले टॉप-10 राज्यों की लिस्ट से छत्तीसगढ़ बाहर
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कोरोना संक्रमण: सुधरते दिख रहे हालात

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण से गंभीर हुए हालात धीरे-धीरे सुधरते दिख रहे हैं। रविवार को प्रदेश में 42 हजार 32 टेस्ट हुए और 11 हजार 825 नए संक्रमित सामने आए। इस आंकड़े के साथ ही प्रदेश रोजाना नए संक्रमित मरीजों की सर्वाधिक संख्या वाले शीर्ष 10 राज्यों की सूची से बाहर निकल आया है। राज्यों के क्रम में अभी छत्तीसगढ़ 14वें स्थान पर है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार शीर्ष 10 राज्यों में शामिल हैं। हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी रविवार को संक्रमित पाए गए मरीजों की संख्या छत्तीसगढ़ से अधिक हो गई है। हालांकि मरीजों की संख्या में सुधार के संकेत के बाद भी छत्तीसगढ़ में कोरोना से हो रही मौतें चिंताजनक बनी हुई हैं। राज्य में रविवार को 199 मौतें दर्ज हुईं। यह आंकड़े केवल महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से ही कम हैं। मरीजों के मौत की बड़ी वजह सांस लेने में दिक्कत बताई जा रही है।

ठीक होने वालों की तादाद बढ़ी : छत्तीसगढ़ में कोरोना को मात देने वालों की तादाद बढ़ी है। रविवार को नए संक्रमित मिले 11 हजार 825 के मुकाबले ठीक होने वालों की संख्या 12 हजार 358 रही। 25 अप्रैल से 1 मई तक सप्ताह में 93 हजार 476 लोगों ने कोरोना को हराया है। इस बीच 92 हजार 240 लोग कोरोना की चपेट में भी आए हैं। प्रदेश में कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद से अब तक पॉजिटिव पाए गए 7 लाख 44 हजार 602 लोगों में से 6 लाख 14 हजार 693 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें से 4 लाख 88 हजार 988 होम आइसोलेशन में और 1 लाख 25 हजार 705 मरीज विभिन्न अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में इलाज के बाद ठीक हुए हैं। वर्तमान में राज्य में रिकवरी रेट 82 प्रतिशत है।

हॉटस्पॉट में घटने लगा संक्रमण : राज्य में कोरोना के हॉटस्पॉट बन चुके शहरों में भी संक्रमण घटता हुआ दिख रहा है। सबसे संक्रमित जिलों में शुमार रायपुर में रविवार को 1011 नए मरीज मिले। अप्रैल की शुरुआत में रायपुर की संक्रमण दर 50त्न से अधिक थी। अब यह 29त्न तक घट गई है। राजनांदगांव में 24त्न, दुर्ग में 15 प्रतिशत, जशपुर में 11 प्रतिशत और बलौदा बाजार में 7 प्रतिशत की गिरावट दिखी है। यह गिरावट 24 से 30 अप्रैल के बीच हुई है।

राहत होम आइसोलेशन में 5 लाख से ज्यादा ठीक : प्रदेश में होम आइसोलेशन में 80 फीसदी मरीज स्वस्थ हुए हैं। ये बड़ा आंकड़ा है। डॉक्टरों के अनुसार बिना व हल्के लक्षण वालों के लिए होम आइसोलेशन श्रेष्ठ है। घर का माहौल खुशनुमा होता है, जिससे मरीजों को स्वस्थ होने में काफी मदद मिलती है। क्रास इंफेक्शन का भी खतरा नहीं रहता। यही कारण है कि कुछ अपवाद को छोड़कर ज्यादातर मरीज 7 से 10 दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि होम आइसोलेशन में 17 दिन रहने का नियम है।

प्रदेश में 15274 और रायपुर में 1012 नए केस, 266 मौतें भी : प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 9200 पहुंच गई है। केवल रायपुर में ही कोरोना से 2500 से ज्यादा मौतें हुई हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि मार्च 2020 से अब तक होम आइसोलेशन में ठीक होने वालों की संख्या 5 लाख से ज्यादा पहुंच गई है। जबकि अस्पताल व होम आइसोलेशन मिलाकर 6.39 लाख मरीज रिकवर हो गए हैं। सोमवार को राजधानी में 1012 समेत प्रदेश में 15274 नए संक्रमित मिले हैं। रायपुर में 63 समेत प्रदेश में 266 मरीजों की मौत भी हुई है। लगातार मरीजों के स्वस्थ होने के कारण प्रदेश में सप्ताहभर में रिकवरी रेट 3 फीसदी बढ़ा है और 83 फीसदी के आसपास पहुंच गया है। चिंता की बात यह है कि पिछले 12 दिनों में 2742 मौत हुई है। कोरोना से रोजाना औसतन 228.5 मरीजों की जान जा रही है। पिछले एक माह में कोरोना के कारण सडन डेथ यानी कार्डियक अरेस्ट के कारण आधे से ज्यादा गंभीर मरीज जान गंवा रहे हैं।

प्रदेश में सबसे ज्यादा रायपुर में 2500 से ज्यादा मौत हुई है, जो कुल मौत की 27 फीसदी है। श्री नारायणा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका व कोरोना कोर कमेटी के सदस्य डॉ. आरके पंडा के अनुसार ज्यादा मौत के लिए नए वेरिएंट व मरीजों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार है। मरीज लक्षण दिखते ही जांच व इलाज करवाएं तो मौतों की संख्या आधी हो सकती है। मरने वालों में 90 फीसदी मरीजों को सांस की तकलीफ होती है। यानी जब मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, तब उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही होती है। उन्हें तत्काल आक्सीजन व वेंटीलेटर की जरूरत होती है। अगर मरीज दूसरी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो मौत का रिस्क और बढ़ जाता है।

कोरोना की दूसरी लहर में मरीज ज्यादा

राजधानी रायपुर में पहली लहर के एक साल के अधिक के वक्त में जितने केस मिले, उससे दूसरी लहर के केवल एक माह में ज्यादा केस मिल चुके हैं। यही नहीं पहली लहर में जहां आउटर के इलाके में कम संक्रमित मिल रहे थे, दूसरी लहर में इस ट्रेंड में भी बदलाव आ गया है। अप्रैल के पूरे माह और मई की शुरूआत में आउटर के इलाके में भी लगातार केस में इजाफा हुआ है। मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों के मुताबिक दूसरी लहर के ट्रेंड में एक बड़ा बदलाव ये भी रहा है कि इसमें अब तक तकरीबन 3 प्रतिशत केस ऐसे आए, जो दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। यानी राजधानी में मिले 77 हजार से ज्यादा केसों में 2 हजार से अधिक ऐसे केस रहे हैं जो दूसरी बार कोरोना की जद में आए हैं। दरअसल, पहली लहर में 18 मार्च से इस साल 31 मार्च के बीच रायपुर में केवल 65672 केस निकले। जबकि अप्रैल में दूसरी लहर के दौरान अब तक साढ़े 77 हजार से अधिक केस मिल चुके हैं।

आउटर में केस ज्यादा निकले

पहली लहर में रायपुर जिले में मिले 65 हजार से अधिक केस में आउटर के इलाकों में मिले केस का प्रतिशत 20 प्रतिशत के आसपास रहा। जबकि दूसरी लहर में मिले 77 हजार से ज्यादा केस में आउटर के इलाकों में ये प्रतिशत 34 से अधिक हो गया है। यही नहीं अप्रैल के आखिरी हफ्ते में रायपुर में मिले 22 हजार से ज्यादा केसों में 9 हजार से अधिक केस आउटर के इलाकों से निकले हैं। जानकारों के मुताबिक दूसरी लहर का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र पर एक समान रहा है। इस बार गांव में भी थोक में मरीज निकल रहे हैं। जबकि पहली लहर में बहुत से गांव ऐसे रहे जहां एक भी केस नहीं निकला।

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