आंध्र प्रदेश

पश्चिम बंगाल सहित इन राज्यों की सरकारी बिजली उत्पादक कंपनियों पर सीआईएल का करीब 6,477.5 करोड़ रुपये का बकाया

Bharti sahu
1 May 2022 11:41 AM GMT
पश्चिम बंगाल सहित इन राज्यों की सरकारी बिजली उत्पादक कंपनियों पर सीआईएल का करीब 6,477.5 करोड़ रुपये का बकाया
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थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी की वजह से पूरे भारत में घनघोर बिजली संकट छाया हुआ है.

थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी की वजह से पूरे भारत में घनघोर बिजली संकट छाया हुआ है. इस बीच, खबर यह भी है कि कोयले की कमी की शिकायत करने वाले राज्यों पर कोई इंडिया का हजारों करोड़ रुपये का बकाया है. पश्चिम बंगाल, झारखंड, तमिलनाडु, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की सरकारी बिजली उत्पादक कंपनियों पर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का करीब 6,477.5 करोड़ रुपये का बकाया है.

महाराष्ट्र-बंगाल सबसे बड़े बकाएदार
सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन कंपनी पर कोल इंडिया का सबसे अधिक 2,608.07 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि पश्चिम बंगाल विद्युत विकास कॉरपोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूपीडीसीएल) पर 1,066.40 करोड़ रुपये बाकी है. सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल की बिजली उत्पादन कंपनियों पर बकाया बहुत ज्यादा है, लेकिन सीआईएल ने इन्हें आपूर्ति कभी नहीं रोकी और उन्हें पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति की है.
तेनुघाट बिजली निगम पर 1018.22 करोड़ बाकी
सरकार के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, झारखंड की तेनुघाट बिजली निगम लिमिटेड के ऊपर कोल इंडिया का 1018.22 करोड़ रुपये, तमिलनाडु जनरेशन एंड एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के ऊपर 823.92 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश पावर जनरेशन कंपनी के ऊपर 531.42 करोड़ रुपये, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के ऊपर 429.47 करोड़ रुपये का बकाया है.
आंध्र प्रदेश पर 764.70 करोड़ बाकी

वहीं, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड का आंध्र प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम पर 764.70 करोड़, कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 514.14 करोड़, तमिलनाडु एनर्जी कंपनी लिमिटेड पर 59.19 करोड़ और तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरर्पोरेशन लिमिटेड के ऊपर 32.79 करोड़ रुपये का बकाया है.
बकाए के बावजूद आपूर्ति बाधित नहीं
कोयल की आपूर्ति और उत्पादन करने वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड का कहना है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य के बिजली उत्पादक कंपनियों से संबंधित बकाया बहुत अधिक हैं. फिर भी कंपनी ने कभी भी इनको दी जाने वाली कोयले की आपूर्ति को रोका नहीं है और उप-समूह योजना और रेक की उपलब्धता के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति की गई है.


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