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सम्पादकीय

सुरक्षा की ओर

Triveni
22 July 2021 3:55 AM GMT
सुरक्षा की ओर
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ताजा सीरोलॉजिकल सर्वे के नतीजे देख जहां एक ओर खुशी होती है,

ताजा सीरोलॉजिकल सर्वे के नतीजे देख जहां एक ओर खुशी होती है, वहीं दूसरी ओर, चुनौती भी नजर आती है। देश भर में किए गए सीरो सर्वे में 67.6 प्रतिशत लोग पॉजिटिव पाए गए हैं, अर्थात इतने प्रतिशत लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, और उनके शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। जून-जुलाई में हुए इस सर्वे से कोरोना के खिलाफ भारतीयों की बढ़ती सुरक्षा का अंदाजा होता है। आश्चर्य नहीं, देश में बड़ी संख्या में लोगों को कोरोना ने संक्रमित किया है और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं मिली है। आधिकारिक रूप से भारत में महज 3.12 करोड़ लोग ही कोरोना संक्रमित हुए हैं। संभव है, इससे चार गुना मामले दर्ज नहीं हो सके हैं। ऐसे में, दर्ज और दर्ज न होने वाले मामले करीब 13 करोड़ के करीब हैं, जबकि सीरो सर्वे के मुताबिक, देश में 75 से 80 करोड़ लोगों तक कोरोना संक्रमण पहुंच चुका है। कोरोना का खतरा भले ही पूरी तरह न टला हो, लेकिन मोटे तौर पर भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोग अपेक्षाकृत सुरक्षित हो गए हैं।

अब चिंता उन 40 से 50 करोड़ लोगों की है, जिन तक अभी कोरोना नहीं पहुंचा है। सीरो सर्वे मोटे तौर पर एक अनुमान ही पेश करता है। काश, यह बता पाता कि किन लोगों तक संक्रमण नहीं पहुंचा है। यदि यह पता लग जाए कि कौन अभी भी ज्यादा असुरक्षित है, तो उसे टीकाकरण और अन्य उपायों से सुरक्षित करने पर जोर लगाया जा सकता है। चूंकि वास्तविक स्थिति से हम अनजान हैं, इसलिए उन तमाम लोगों तक हमें जल्द से जल्द टीकों का लाभ पहुंचाना चाहिए, जो अभी तक वंचित हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सीरो सर्वे का चौथा चरण जून-जुलाई में 21 राज्यों के 70 जिलों में आयोजित किया गया था। इसमें 6-17 वर्ष की आयु के बच्चे भी शामिल थे। खास बात यह भी कि सर्वेक्षण में शामिल किए गए स्वास्थ्यकर्मियों में 85 प्रतिशत में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई है, जबकि स्वास्थ्यकर्मियों में 10 प्रतिशत को अब तक टीका नहीं लग पाया है। यह एक ऐसा मोर्चा है, जहां सख्ती से कदम उठाने चाहिए और तमाम स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा कवच से सुसज्जित करना चाहिए। यदि हम चिकित्साकर्मियों और तमाम डॉक्टरों को कोरोना से सुरक्षित कर सकें, तो भी यह हमारे लिए बड़ी सफलता होगी और स्वास्थ्य सुविधाओं में व्यापक सुधार आएगा।
हमें सावधान रहने की जरूरत है, कोरोना अभी गया नहीं है। कई राज्यों में चिंता कायम है। प्रधानमंत्री भी बार-बार सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय को लक्ष्य दिया गया है कि वह किसी तरह से तीसरी लहर को रोके। तीसरी लहर को रोकने में सीरो सर्वे से सहायता मिल सकती है। सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक स्तर पर भीड़ को रोकना जरूरी है। अनावश्यक यात्राओं से बचना और पूरी तरह से टीकाकरण ही सबसे अच्छे उपाय हैं। इधर, स्कूलों को खोलने की जल्दी दिख रही है, तो हमें पूरी तरह से विचार कर लेना चाहिए। एक तरफ, बच्चों में संक्रमण को लेकर्र ंचता है, दूसरी ओर, स्कूल खोलने की चर्चा विरोधाभास ही है। आईसीएमआर ने सुझाया है कि प्राथमिक विद्यालयों को पहले खोलना विवेकपूर्ण होगा, क्योंकि बच्चे संक्रमण से कहीं बेहतर निपट सकते हैं। हालांकि, पहले यह देख लेना चाहिए कि क्या सभी अभिभावकों और स्कूल स्टाफ का टीकाकरण हो चुका है?


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