सम्पादकीय

T20I World Cup 2022: ईशान किशन ने वर्ल्ड कप के लिए जगह पक्की कर ली है?

Gulabi
1 March 2022 8:56 AM GMT
T20I World Cup 2022: ईशान किशन ने वर्ल्ड कप के लिए जगह पक्की कर ली है?
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धोनी के साये से अलग होते अपनी पहचान बनाने में कामयाब?
अगर आप मुंबई से उभरने वाले एक युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं तो आपको रोहित शर्मा से तुलना वाले दौर से गुजरना होगा, अगर दिल्ली से आते हैं तो हर कोई आप में एक नया विराट कोहली तलाशने की कोशिश करेगा और अगर आप एक विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और झारखंड से आते हैं तो निश्चित तौर पर हर कोई आपकी तुलना महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के शुरुआती दौर से करने लगेगा. जी हां, हम बात कर रहे हैं, ईशान किशन (Ishan Kishan) की जिन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ (India vs Sri Lanka) टी20 सीरीज के आखिरी मैच में नहीं खेलने के बावजूद टीम इंडिया के लिए श्रेय्यस अय्यर के बाद सबसे ज्यादा रन बनाए.
धोनी के साये से अलग होते अपनी पहचान बनाने में कामयाब?
सवाल वही उठता है कि क्या वाकई में ईशान किशन (Ishan Kishan) ने अपनी एक अलग छवि बना ली है? टीम इंडिया (Team India) के पूर्व कप्तान की तरह किशन महानता की उन ऊंचाईयों को छू पाते हैं या नहीं ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है लेकिन अब तक के छोटे करियर में वे खुद को धोनी के साये से अलग करते हुए एक अलग पहचान बनाने में कामयाबी हासिल करते दिख रहे हैं. जिस किशन को 2016 के आईपीएल नीलामी में गुजरात लॉयंस ने 35 लाख में खरीदा था, उसी खिलाड़ी के लिए इतिहास की सबसे कामयाब टीम मुंबई इंडियंस 2022 में मुंहमागी कीमत देकर अपनी टीम में शामिल करना चाहती थी. और रिकॉर्ड 15 करोड़ 25 लाख खर्च करके अपनी टीम में शामिल किया.
मुंबई के इस रवैये में शायद आपको 2008 नीलामी में चेन्नई सुपर किंग्स के उस रवैये की झलक मिले जब वो हर हाल में धोनी को अपनी टीम में शामिल करना चाहते थे. लेकिन, धोनी के लिए चेन्नई की दीवानगी को समझा जा सकता था क्योंकि वो तब तक 2007 में पहला टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान बन चुके थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद बल्लेबाज़-कीपर के तौर पर लोहा मनवा चुके थे. लेकिन, किशन तो अब तक भारत के लिए ना तो टेस्ट खेले है और ना ही वो वन-डे में (सिर्फ 3 मैच खेले हैं) बहुत जल्दी खेलते दिखेंगे. टी20 में भी उनकी जगह इससे पहले पक्की नहीं थी. लेकिन, मुंबई इंडियंस ने उनमें आज नहीं सालों पहले कुछ तो ख़ास देखा है जिसके चलते वो पटना के मूल निवासी किशन पर 2018 में भी 6 करोड़ 2 लाख खर्च करने से हिचके नहीं.
बैकअप विकेटकीपर के तौर पर किशन टीम की पहली पसंद?
बहरहाल, अब श्रीलंका सीरीज़ ख़त्म होने के बाद किशन ने ये तो पक्का कर दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए बैकअप विकेटकीपर के तौर पर वो टीम इंडिया की पहली पसंद होंगे. किशन के साथ फायदा ये है कि वो रोहित शर्मा-के एल राहुल में किसी एक की जगह पर सलामी बल्लेबाज़ की भूमिका निभा सकते हैं अगर टीम को टॉप ऑर्डर में पहली गेंद से ही हमला बोलने वाला एक बल्लेबाज़ चाहिए. बाएं हाथ का होने के चलते किशन टॉप ऑर्डर में विविधिता का विकल्प भी देते हैं जो सिर्फ दायें हाथ के बल्लेबाज़ों के दबदबे से भरा दिखता है जब तक कि रवींद्र जडेजा और ऋषभ पंत बल्लेबाज़ी के लिए मिडिल ऑर्डर में नहीं आते हैं. इतना ही नहीं किशन एक और खिलाड़ी के लिए बैक-अप की भूमिका निभा सकते हैं और वो बेहद अहम खिलाड़ी है पंत. 23 साल के किशन, पंत की तरह विकेटकीपर की भमिका निभा सकते हैं और साथ ही मिडिल ऑर्डर में भी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं.
लेकिन, किशन फिलहाल चैन की नींद नहीं ले सकते?
लेकिन, इन तमाम खूबियों के बावजूद किशन फिलहाल चैन की नींद नहीं ले सकते हैं. अगले दो महीने आईपीएल में उन्हें अपने बल्ले और कीपिंग से अपने खेल में स्थिरता दिखानी होगी, एक ऐसा मुद्दा जिसे सुनील गावस्कर ने भी उठाया है. स्थिरता इसलिए दिखानी होगी क्योंकि उनकी पोज़िशन के लिए, उन्हीं जैसे मिजाज वाला एक और विकेटकीपर-बल्लेबाज़, संजू सैमसन के तौर पर, कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा का पसंदीदा खिलाड़ी है. सैमसन भी वो सब कुछ कर सकते हैं जो किशन कर दिखाने की काबिलियत रखते हैं. सैमसन के खेल में भी वही कमियां हैं (निरंतरता की) जो किशन के खेल में हैं. लेकिन, सैमसन के साथ एक बड़ा फायदा ये है कि वो तेज़ गेंदबाज़ी के आगे काफी सहज़ दिखते हैं और ऑस्ट्रेलियाई पिचों की उछाल को देखते हुए उनके स्टोक्स-प्ले को ज़्यादा तरज़ीह दी जा सकती है. श्रीलंकाई गेंदबाज़ के बाउंसर पर चोटिल होकर सीरीज़ से बाहर होने वाले किशन के लिए इस बात को आने वाले कुछ महीनों में साबित करना होगा कि वो तेज गेंदबाजी के खिलाफ कमज़ोर नहीं कहे जा सकते हैं.
समानताओं के बावजूद धोनी से तुलना नहीं होने की ठोस वजह
धोनी भारतीय क्रिकेट में आये और आते ही छा गये और जबतक वो खेले उन्हें एक बार भी टीम से बाहर नहीं होना पड़ा वहीं किशन के लिए तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बस शुरुआत ही हुई है. शायद इसलिए तमाम समानताओं के बावजूद किशन और धोनी की तुलना कभी भी वैसे नहीं हुई जैसा कि रोहित की सचिन तेंदुलकर के साथ या फिर कोहली की शुरुआती दौर में वीरेंद्र सहवाग के साथ हुई. रोहित को अपने करियर में ग़ैर-जरूरी तुलनाओं और उम्मीदों के बोझ से गुज़रना पड़ा था लेकिन कोहली के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ.
ईशान किशन भाग्यशाली…
ईशान किशन खुद को इस मामले में भाग्यशाली मान सकते हैं कि उनकी चर्चा के समय धोनी का उदाहरण ज़बरदस्ती नहीं दिया जाता है और शायद इसलिए वो अब तक बेफिक्र होकर अपनी क्रिकेट खेले हैं. अगर किशन की ये बेफिक्री बरकरार रही तो हो सकता है कि वो भी माही भाई की तरह टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा हों. धोनी की तरह वो कप्तान बन कर वो कप भले नहीं उठा सकते हैं लेकिन रोहित के लिए जीत के अहम हीरो तो बन ही सकते हैं जैसे, कि वो पिछले कुछ सालों से मुंबई इंडियंस के लिए कर रहे हैं.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए जनता से रिश्ता किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)
विमल कुमार
न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.
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