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सम्पादकीय

G-7 Summit : अर्थव्यवस्था को उबारने में सहयोगी बन सकता है अमीर देशों के इस मंच पर भारत की भागीदारी

Ritu Yadav
11 Jun 2021 9:24 AM GMT
G-7 Summit : अर्थव्यवस्था को उबारने में सहयोगी बन सकता है अमीर देशों के इस मंच पर भारत की भागीदारी
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इसी हफ्ते ब्रिटेन में होने जा रहे है G-7 समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लें रहे हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | संयम श्रीवास्तव | इसी हफ्ते ब्रिटेन में होने जा रहे है G-7 समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी हिस्सा लें रहे हैं, हालांकि उनका पार्टिसिपेशन वर्चुअल ही रहेगा. कोरोना के चलते उन्होंने ब्रिटेन में हो रहे इस सम्मेलन में उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी. फिर भी यह समिट पश्चिमी देशों (Western Countries) के साथ भारत के एक नए रिश्ते को आयाम दे सकता है. करीब एक दशक से भारत का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महत्व बढ़ गया है. दरअसल साल 2008 के बाद से ही पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई है. वहीं चीन (China) इस मामले में तेजी से आगे निकल रहा है. जो बाइडेन से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप (Donald Trump) की नीति 'अमेरिका प्रथम' की नीति थी, जिसने अमेरिका (America) और पश्चिमी देशों के बीच दरार पैदा कर दी थी. लेकिन अब जो बाइडेन इस दरार को भरने के लिए एक विदेशी दौरे पर निकल रहे हैं. इस दौरे में वह सभी यूरोपीय देशों के साथ-साथ दुनिया भर के देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते मजबूत करेंगे. इसके साथ ही कोरोना महामारी से उभरी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए भी अमेरिका भारत, ब्रिटेन और G-7 देशों के साथ मिलकर काम करने की भी बात कर रहा है. भारत के लिए यह एक बेहतरीन मौका है कि वह यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को एक नया विस्तार दे सके.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन एक हफ्ते तक यूरोप और ब्रिटेन की यात्रा पर रहेंगे. इसमें वह 'नाटो' देशों के नेताओं से बातचीत करेंगे. उसके बाद जिनेवा में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर अपनी यात्रा का समापन करेंगे. दरअसल अमेरिका अब रूस के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीं डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिकी प्रथम' की नीति के कारण भारत और तमाम देशों से जो अमेरिका के रिश्ते खराब हुए थे, उन्हें भी जो बाइडेन अब ठीक करने की ओर अग्रसर हैं. इसके साथ जलवायु परिवर्तन, चीन की आक्रामक चुनौतियां और महामारी के बाद उभरी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर काम करने की ओर भी अमेरिका अग्रसर है.
पश्चिमी देशों से अपने संबंध बेहतर करेगा भारत
मार्च में जब क्वाड समिट हुआ था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के साथ अमेरिका ने भाग लिया था तब दुनिया ने खासतौर से चीन ने भारत की शक्ति और उसके मित्र देशों का उसके साथ खड़ा होना देखा था. इसके बाद अब भारत G-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेने जा रहा है, जिसमें वह पश्चिमी और गैर पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध बेहतर बनाएगा.
भारत के लिए कॉर्नवाल शिखर सम्मेलन बेहद जरूरी है. इसके जरिए वह पश्चिम के देशों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत कर सकता है. भारत का पश्चिमी देशों से संबंध बेहतर होना कहीं ना कहीं चीन के साथ उसके संबंधों में लगातार बिगड़ते हालात भी हैं. 2013-14, 17 और 2020 में उत्तरी सीमाओं पर लगातार चीन के साथ हुई झड़पों ने भारत को यूरोपीय देशों और अमेरिका के करीब ला दिया है.
भारत ने चीन से रिश्ते सुधारने के लिए कई बार कोशिश की, चाहे वह (आर आई सी) यानि रूस, भारत, चीन फोरम हो या फिर ब्रिक्स, ब्राजील-रूस-भारत-चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे मंचों के माध्यम से एक साथ आने की कोशिश हो या फिर चीन के राष्ट्रपति को भारत के दौरे पर बुलाकर उनका स्वागत सत्कार करना हो. लेकिन चीन ने हर बार भारत के पीठ में खंजर भोंका है. चीन ही एक ऐसा बड़ा देश है जिसने हर बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का विरोध किया है. लेकिन इतिहास में ऐसा कुछ नहीं था, शीत युद्ध के अंत में भारत का मानना था कि अमेरिका के वर्चस्व को रोकने के लिए चीन का सहयोग करना जरूरी है. लेकिन अब शायद देश को पता चल गया होगा कि भारत की सुरक्षा और उसके विकास के आगे अगर कोई रोड़ा बन रहा है तो वह सिर्फ और सिर्फ चीन है.
इंडो पेसिफिक रीजन में भारत बनेगा बड़ा मार्केट
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि 21वीं सदी के लिए इंडो-पेसिफिक रीजन केंद्र बिंदु है और भारत इसका मुख्य आकर्षण है. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत ग्लोबल इकोनामिक ग्रोथ का इंजन माना जाता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यह G-7 समिट भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि बढ़ते जनसंख्या के साथ भारत दुनिया के लिए एक आकर्षक मार्केट बनता जा रहा है. इसके साथ भारतीय महासागर एशिया और अफ्रीका के मध्य में स्थित है जहां चीन जैसा अथॉरिटेरियन देश अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है. इस स्थिति में चाइना को आंख दिखाने के लिए भारत के साथ दोस्ती करना कई देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगी भारत की छवि
भारत के लिए इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पैर जमाना कई मायनों में फायदेमंद साबित होगा. कोरोना महामारी के पहले और दूसरी लहर की वजह से भारत को भी बहुत बड़ा झटका लगा है. भारत की अर्थव्यवस्था जिस तरह से कोरोना वायरस की वजह से प्रभावित हुई है,‌ यह समिट भारत में पोस्ट कोविड-19 परिस्थितियों को सुधारने में मददगार साबित होगी. इसके साथ इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ना ही सिर्फ भारत की छवि सुधारेगी, बल्कि दुनिया को मोदी नीति की समझ भी देगी, जिससे भारत अपनी पहुंच को और बढ़ा सकता है.


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