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वन अधिकार अधिनियम वनवासियों के कानूनी अधिकार के साथ-साथ कर्तव्यों का भी करती है निर्धारण -कलेक्टर

jantaserishta.com
24 March 2022 7:09 AM GMT
वन अधिकार अधिनियम वनवासियों के कानूनी अधिकार के साथ-साथ कर्तव्यों का भी करती है निर्धारण -कलेक्टर
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गौरेला पेण्ड्रा मरवाही: कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मंजीत कौर बल की उपस्थिति में वन विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग के साथ एफआरए अधिनियम के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार अनुबंध अंतर्गत आज कार्यशाला आयोजित की गई।

परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास विभाग सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में कलेक्टर ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम वनवासियों के कानूनी अधिकार के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का भी निर्धारण करती है। यह कार्यशाला में वन अधिकार अधिनियम 2006 एवं नियम 2007 तथा संशोधित नियम 2012 के विषय पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए रखा गया।
प्रशिक्षण में कलेक्टर ने आदिवासी विकास विभाग द्वारा जिले में अब तक हुए व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार पट्टा वितरण आदि कार्यो की जानकारी ली। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राजस्व, आदिवासी विकास विभाग, वन विभाग तथा संबंधित विभागों के समन्वय से कार्य करते हुए हितग्राहियों को लाभान्वित करने कहा। प्रशिक्षण में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मंजीत कौर बल द्वारा उपस्थित सभी अधिकारियों से जिले के वन क्षेत्र और वन अधिकार अधिनियम की विशेषता के बारे में चर्चा की गई। प्रशिक्षण में चौपाल संस्था अंबिकापुर के श्री नरेंद्र कुमार द्वारा वन अधिकार अधिनियम के मूलभूत नियमों सहित अन्य आवश्यक प्रावधानों की जानकारी दी गई। उनके द्वारा व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार, पर्यावास (विकास के लिए अधिकार) पर विस्तार से जानकारी दी गई तथा उनके द्वारा राज्य स्तरीय निगरानी समिति, जिला स्तरीय समिति, उपखंड स्तरीय समिति, वन अधिकार समिति के सदस्यों के चयन की शर्तें तथा अध्यक्ष व सदस्यों के कार्यो व दायित्वों के बारे मे बताया गया।
कार्यशाला में अधिनियम के स्वरूप, दावा प्रारंभ करने के लिए ग्राम सभा की बैठक, सामुदायिक वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार, दावों की तैयारी के लिए कोर ग्रुप का चयन करने के लिए गांव के बुजुर्ग, गांव में निवासरत सभी समुदाय के प्रतिनिधि, महिलाए, वैद्य, पटेल, पेरमा, वड्डे आदि की भूमिका, सीमावर्ती गांवों की प्रारंभिक सूचना, प्रारंभिक सीमाओं की पहचान के लिए भ्रमण, नजरी नक्शा तैयार करना, वन-राजस्व विभाग को दावों के स्थल सत्यापन, पारंपरिक सीमा का सीमांकन जीपीएस तकनीक से किया जाना आदि महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होने कहा ही अधिनियम के तहत हितग्राही के अधिकार सुनिश्चित करने में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कार्यशाला में वनमंडलाधिकारी श्री दिनेश पटेल, परियोजना प्रशासक श्री के. एन. मिश्रा, अध्यक्ष जनपद पंचायत गौरेला सुश्री ममता पैकरा, अध्यक्ष जनपद पंचायत पेंड्रा श्रीमती आशा बबलू मरावी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती संगीता करसायल, श्रीमती जानकी सर्राटी, जनपद पंचायत सदस्य श्री ब्रिजलाल सिंह राठौर, श्री जगदीश खत्री, श्री भंवर सिंह आर्मो, सुश्री रामप्यारी बैगा, श्री इंद्रसेन मरावी, संयुक्त कलेक्टर विरेंद्र सिंह, अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) पेंड्रारोड एवं मरवाही, तीनों जनपद पंचायतो के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, मंडल संयोजक, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी की शोध सहयोगी श्वेता दास, चौपाल संस्था के सदस्य श्री चंद्रिका साहू, नवनिर्माण चेतना मंच से सुश्री रीना एवं चंद्र प्रताप सिंह उपस्थित थे।


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