Keshavnagar में दो कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट बंद, पुणे में कचरा संकट गहराया
Maharashtra महाराष्ट्र: पुणे में कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि केशवनगर में स्थित दो प्रमुख कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट बंद हो गए हैं। इन परियोजनाओं के ठप होने के बाद शहर के कई इलाकों में कचरे का ढेर लगने लगा है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर सोमवार को पुणे नगर निगम (PMC) की आम सभा की बैठक में भी जोरदार बहस देखने को मिली। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए।
नगर प्रशासन ने भी स्वीकार किया है कि शहर में कचरा संग्रहण और निपटान की स्थिति प्रभावित हुई है। अधिकारियों के अनुसार, कई क्षेत्रों में कचरा जमा हो रहा है क्योंकि कचरा प्रोसेसिंग के कई प्लांट या तो बंद हैं या फिर अपनी क्षमता से काफी कम काम कर रहे हैं।
PMC अधिकारियों ने जानकारी दी कि केशवनगर स्थित साईराम और नेफ्रा कचरा प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 150 टन प्रतिदिन है, फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। इनमें से साईराम प्रोजेक्ट को विस्तार कार्य के चलते अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जबकि नेफ्रा प्लांट तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह से बंद पड़ा है।
इन दोनों प्रमुख परियोजनाओं के बंद होने का सीधा असर शहर की कचरा निस्तारण व्यवस्था पर पड़ा है। रोजाना उत्पन्न होने वाले कचरे का समय पर निपटान न होने से विभिन्न इलाकों में कचरे का ढेर लगने लगा है, जिससे बदबू, संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है।
नगर निगम प्रशासन ने कहा है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है और बंद पड़े प्लांटों को जल्द से जल्द शुरू करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, फिलहाल राहत मिलने में समय लग सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने भी नगर निगम से जल्द समाधान की मांग की है, क्योंकि कचरे के बढ़ते ढेर से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
कुल मिलाकर, केशवनगर के दो प्रमुख प्रोजेक्ट बंद होने से पुणे की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है और यह मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।