त्योहार : आज ईद-उल-फितर इनाम और इबादत का दिन

0

जनता से रिश्ता वेबडेस्क । ईद-उल-फितर। इस त्योहार का सामाजिक महत्व भी किसी मायने में कम नहीं है। तभी तो किसी ने कहा है कि हिलाल-ए-ईद जो देखा तो ख्याल हुआ उन्हें गले लगाए एक साल हुआ। ईद-उल-फितर इनाम और इबादत का दिन है।

इस दिन हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि हमें अल्लाह ने रोजा रखने की तौफीक और रूहानी तरक्की अता फरमाई। गुनाहों से महफूज रखा। ईद उल-फ़ितर पैगम्बर मोहम्मद ने 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया था। माह-ए-रमजान में ही कुरान-ए-करीम नाजिल हुआ। ईद इसका जश्न भी है। रोजेदारों ने रोजे रखे, पूरे महीने इबादत की। कामयाबी हासिल की। ईद-उल-फितर इसका भी जश्न है। अल्लाह तआला का हुक्म है कि हम लोगों के साथ मोहब्बत के साथ पेश आएं, गरीबों की मदद करें।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) बड़ी सादगी से ईद मनाया करते थे। एक बार हज़रत मुहम्मद ईद के दिन सुबह-सवेरे फज्र की नमाज के बाद बाजार गए। रास्ते में आपको एक छोटा सा यतीम बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया। हजरत मुहम्मद उसके पास गए तो बच्चे ने बताया कि आज ईद का दिन है और उसके पास नए कपड़े तक नहीं हैं। हजरत मुहम्मद बच्चे को घर ले आए। बच्चे से कहा हजरत आयशा उसकी मां और बेटी फातिमा उसकी बहन हैं, हुसनैन उसके भाई हैं।
बच्चे को नए कपड़े पहनाए और उसे खूब प्यार दिया ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो। बच्चा मक्का की गलियों में दौड़ा और कहने लगा कि आज ईद का दिन है। आयशा उसकी मां, फातिमा उसकी बहन और हुसनैन उसके भाई हैं। सही मायनों में ईद का अर्थ यही है।