कीटोजेनिक आहार योजना को अस्थायी करार देकर साथ ही इसमें शामिल आहारों को काफी प्रतिबंधक माना

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क:- अलग-अलग आहार योजनाओं के अपने-अपने फायदे होते हैं, फिर भले ही वह सूची में नंबर एक पर हो या फिर सबसे नीचे। ज़रुरत है कि उन्हें सही तरीके और पूरे ध्यान से अपनाया जाए ताकि लंबे समय में वह आपके शरीर को नुकसान ना पहुंचाए।आहार हमें प्रिय होते हैं और कुछ सही आहारों को अपनाकर हम काफी खुश होने लगते हैं। आज जब इसे लेकर कई सारी जानकारियां आसानी से उपलब्ध हैं, इसके बावजूद कभी-कभी हम अपनी वज़न समस्याओं के लिए क्या सही है और क्या गलत, यह नहीं जान पाते। इस बीच, कई ऐसे आहार भी होते हैं जिन्हें सुझाने वालों ने पहले इसे खुद अपनाया होता है और फिर जांच के बाद ही वे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इसे अपनाने की सलाह देते हैं। इस दिशा में कीटोजेनिक आहार योजना काफी नई है और इसके बारे में या यह कैसे काम करता है- इसकी ज़्यादा जानकारी नहीं है। सबसे बढ़िया आहार सूची में कीटो आहार को सबसे नीचे रखा गया है। जिसके बाद से इस पर बहस छिड़ गई है, खासकर उनके बीच जो कीटोजेनिक आहार योजना का समर्थन करते हैं।यह माना जाता है कि अगर इस योजना के अंतर्गत आप पोषण अम्लरक्तता कीटोसिस तक पहुंच जाते हैं, तो आपके शरीर का वसा जल्दी कम होता है और यह आपके शरीर के लिए पारंपरिक ईंधन यानी ग्लुकोज़ से बेहतर ईंधन साबित होता है। यह आहार योजना कम कार्बोहाइड्रेट, थोड़े प्रोटीन और स्वस्थ वसा की उच्च मात्रा पर केंद्रीत है और इसे अपनाने वाले व्यक्ति के ७० फीसदी आहार में इन सभी तत्वों की मात्रा इतनी ही होनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस योजना को अपनाने से आपको वज़न घटाने में मदद मिलती है और लंबे समय के लिए आप स्वस्थ रहते हैं। ड्युकन और कीटो आहार दोनों ने बढ़िया आहार सूची में संयुक्त रूप से ४० वें नंबर पर जगह पाई। दोनों योजनाएं, कम कार्बोहाइड्रेट मंत्र पर केंद्रीत हैं और ये अम्लरक्तता की प्रक्रिया पर निर्भर होती हैं, जिससे कीटोन्स में जमा वसा टूट जाता है और फिर वह आपके शरीर को ईंधन मुहैया कराने लगता है। दोनों आहार योजनाओं के मुताबिक इस प्रक्रिया के बाद शरीर कार्बोहाइड्रेट का नए तरीके से ग्रहण करना शुरू करता है, जो आपके शरीर को एक नई क्रिया से ईंधन देता है।पैनल में शामिल कई जानकारों ने कीटोजेनिक आहार योजना को अस्थायी करार दिया और साथ ही इसमें शामिल आहारों को काफी प्रतिबंधक माना। वहीं, आहार काफी खर्चीले और आसानी से उपलब्ध ना होने वाले भी हैं- जैसे मकई खाने वाला चिकन या घास खाने वाले पशुओं के दूध से बना मक्खन। साथ ही यह भी पाया गया है कि इसे अपनाने वाले इंसानों को काफी कम कार्बोहाइड्रेट मिलने की वजह से उन्हें चक्कर और थकान होती है, जो कई दूसरी समस्याएं बढ़ाते हैं। अमेरिकी नागरिकों के लिए उनकी ४५-६५ फीसदी कैलोरी की पूर्ति कार्बोहाइड्रेट से और सिर्फ १० फीसदी की वसा से होनी चाहिए। कीटो योजना को तुरंत कार्य करने वाला और लंबे समय में फेल होने वाला पाया गया है। वहीं, जब कई सारे आहार विशेषज्ञों ने इसे रुक-रुक कर उपवास करने की प्रक्रिया में शामिल करने को कहा तो इसके खतरनाकर परिणामों की बात कही जाने लगी, जैसे अगर किसी को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो उसके लिए यह ठीक नहीं होगा। इसके साथ ही, चूंकि यह आहार योजना अपना संतुलन खो सकती है, इससे हार्मोन के आपे से बाहर होने का खतरा भी है, इसलिए इसकी सिफारिश करना कतई सही नहीं है।अलग-अलग आहार योजनाओं के अपने-अपने फायदे होते हैं, फिर भले ही वह सूची में नंबर एक पर हो या फिर सबसे नीचे। ज़रुरत है कि उन्हें सही तरीके और पूरे ध्यान से अपनाया जाए ताकि लंबे समय में वह आपके शरीर को नुकसान ना पहुंचाए। सबसे बढ़िया आहार योजना वह है जो संतुलित होती है और उसमें फलीदार पौधों, पत्तेदार सब्ज़ियों, अच्छे कार्बोहाइड्रेट, बादाम आदि और बीज इन सभी का समावेश होता है और दिन में कम से कम दो बार फलों का सेवन भी करना ज़रूरी है।अच्छा खाएं, लंबा जीवन जीएं और अपनी आहार योजना का विवेकपूर्ण तरीके से पालन करें